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फसल नुकसान से परेशान हैं? शैलेंद्र तिवारी के AI समाधान ने 10,000+ भारतीय खेतों को बचाया

पारंपरिक खेती से टेक्नोलॉजी आधारित फार्मिंग तक: IoT और AI की सफलता की कहानी

शैलेंद्र तिवारी, Fasal के संस्थापक, AI का उपयोग करते हुए
छवि स्रोत: शैलेंद्र तिवारी / लिंक्डइन

कृषि के बदलते परिदृश्य में, जहां जलवायु अनिश्चितता और संसाधनों की कमी पारंपरिक तरीकों को चुनौती देती है, वहां शैलेंद्र तिवारी जैसे नवप्रवर्तक एक नई राह दिखा रहे हैं। Fasal के संस्थापक शैलेंद्र, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) के ज़रिए भारत में स्मार्ट खेती को नई दिशा दे रहे हैं। हाल ही में AgriTalk के एक एपिसोड में उन्होंने बताया कि कैसे उनका स्टार्टअप रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा-आधारित निर्णयों के ज़रिए खेती को बदल रहा है। Fasal के स्मार्ट डिवाइस मिट्टी की नमी, मौसम की स्थिति और फसल की सेहत की निगरानी करते हैं, जिससे किसान सही समय पर फैसले लेकर पानी की बचत और उत्पादकता में वृद्धि कर सकते हैं। किसान की आमदनी बढ़ाना और बर्बादी घटाना Fasal का मूल उद्देश्य है—यह सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि टिकाऊ कृषि का भविष्य है।

IT से खेत तक: शैलेंद्र की यात्रा

शैलेंद्र तिवारी किसानों के साथ काम करते हुए
छवि: Fasal (फेसबुक के माध्यम से)

शैलेंद्र तिवारी ने टेक्नोलॉजी करियर छोड़कर किसानों को सशक्त किया

एक इंजीनियरिंग स्नातक शैलेंद्र तिवारी ने भी पहले कॉर्पोरेट नौकरियों और शहरी जीवन की राह चुनी थी। लेकिन भारतीय कृषि की चुनौतियों ने उन्हें तकनीक के ज़रिए किसानों की कहानी बदलने के लिए प्रेरित किया। Fasal की शुरुआत एक साधारण सोच से हुई—स्मार्ट सेंसर और क्लाउड डेटा की मदद से किसानों को व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना। उनका दृष्टिकोण सिर्फ डिवाइस बेचने तक सीमित नहीं था; वे विश्वास बनाना और ज़मीनी बदलाव लाना चाहते थे।

Fasal का उदय: जब AI मिला कृषि से

Fasal द्वारा खेतों पर लगाए गए IoT डिवाइस
छवि: Fasal (फेसबुक के माध्यम से)

Fasal के स्मार्ट सेंसर फसलों की निगरानी में मदद करते हैं

Fasal का मुख्य समाधान एक सौर ऊर्जा चालित डिवाइस है जिसमें कई सेंसर लगे हैं जो जलवायु, नमी, तापमान और मिट्टी की गुणवत्ता की निगरानी करते हैं। यह डेटा एक AI मॉडल में भेजा जाता है जो सिंचाई शेड्यूल, कीट खतरे और कटाई के समय की भविष्यवाणी करता है। इसका परिणाम यह होता है कि किसानों को वह ज्ञान मिल जाता है जो पहले दशकों के अनुभव से आता था। शैलेंद्र के अनुसार, Fasal का उपयोग करने वाला एक औसत किसान 50% तक पानी की बचत करता है और उपज में 30% तक की बढ़त देखता है।

ज़मीनी प्रभाव: किसानों की ज़ुबानी

Fasal ऐप का उपयोग करते किसान
छवि: Fasal (फेसबुक के माध्यम से)

Fasal की रियल-टाइम जानकारी से सशक्त हुए किसान

Fasal की असली सफलता तकनीक में नहीं, बल्कि किसानों की गवाही में है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश के किसानों ने उत्पादकता में वृद्धि और जोखिम में कमी का अनुभव किया है। एक किसान ने AgriTalk में बताया, “पहले मैं रोज़ फसल को पानी देता था, अब केवल तब देता हूं जब डिवाइस बताता है। लागत कम हुई है और गुणवत्ता बेहतर हुई है।” यह किसान-केंद्रित दृष्टिकोण, जिसमें फील्ड विज़िट, प्रशिक्षण और फीडबैक शामिल है, Fasal को खास बनाता है।

भविष्य की दिशा: स्मार्ट, टिकाऊ और विस्तार योग्य

Fasal मुख्यालय में AI डैशबोर्ड
छवि: Fasal (फेसबुक के माध्यम से)

Fasal का AI डैशबोर्ड रीयल-टाइम अलर्ट प्रदान करता है

शैलेंद्र इसे केवल एक शुरुआत मानते हैं। एशिया और अफ्रीका तक विस्तार की योजना के साथ Fasal अब बहुभाषी इंटरफेस बना रहा है, अपने सिस्टम को लाखों डिवाइसेज़ के लिए स्केलेबल बना रहा है, और सरकारों के साथ साझेदारी कर रहा है। वे कार्बन क्रेडिट कंपनियों के साथ भी काम करना चाहते हैं ताकि टिकाऊ खेती करने वाले किसानों को आर्थिक लाभ मिल सके। उनका लक्ष्य स्पष्ट है: किसानों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना।

मिट्टी से जुड़ी एक स्मार्ट क्रांति

टेक्नोलॉजी से कृषि तक शैलेंद्र तिवारी की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि उद्देश्य के साथ की गई नवाचार कितनी दूर तक जा सकती है। Fasal के माध्यम से वे अत्याधुनिक तकनीक और ज़मीनी खेती के बीच की खाई को पाट रहे हैं। वे केवल खेती का तरीका नहीं बदल रहे—वे खेती के प्रति सोच बदल रहे हैं।

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